नशे की गिरफ्त में मासूम बच्चे, कौन है जिम्मेदार?

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*श्यामों में नशे की गिरफ्त में बच्चे, सार्वजनिक स्थानों पर बढ़ी चिंता*


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आगरा। श्यामों क्षेत्र में कम उम्र के बच्चों और किशोरों के नशे की गिरफ्त में आने को लेकर ग्रामीणों में चिंता बढ़ती जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार श्यामों हाट मोहल्ले के सार्वजनिक शौचालय, कॉलोनियों, अवंती वाई फील्ड सहित कुछ अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी बच्चों और किशोरों के नशा करने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
बताया गया है कि कुछ बच्चे नशे की पूर्ति के लिए भीख मांग रहे हैं और इसी क्षेत्र में रह रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, इनमें से कुछ बच्चे अपने घर भी नहीं लौटते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ताजगंज के बसई पुलिस चौकी के पास रेड लाइट क्षेत्र में श्रृंगार की दुकानों पर सुलोचन, व्हाइटनर और गांजा आदि की बिक्री की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुलोचन और व्हाइटनर जैसे पदार्थों का नशे के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है तथा गांजे के सेवन की भी शिकायतें हैं। कुछ बच्चों की उम्र 10 वर्ष से भी कम बताई जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या बच्चों के भविष्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। सार्वजनिक स्थानों पर नशा करने वाले बच्चों की पहचान कर उन्हें उनके परिवारों तक पहुंचाने के साथ काउंसलिंग और नशामुक्ति उपचार की व्यवस्था किए जाने की जरूरत है।
समाजसेवी विजय सिंह लोधी ने पुलिस एवं प्रशासन से मांग की है कि श्यामों और आसपास के क्षेत्रों में नशीले पदार्थों की बिक्री तथा बच्चों द्वारा नशे के सेवन की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर नियमित निगरानी बढ़ाई जाए और बच्चों को नशे से दूर रखने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाए।
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति या प्रतिष्ठान को बदनाम करना उद्देश्य नहीं है, बल्कि बच्चों के भविष्य को नशे से बचाना ही प्राथमिकता होनी चाहिए।