ब्रज की याद दिलाता कान्हा का छठी उत्सव 

–कृष्ण कन्हैया को केसर हलवा और कड़ी चावल का भोग अर्पण

जीवन में उल्लास का प्रतीक है यह छठी दिवस 

गत सप्ताह जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान कृष्ण का प्राकट्य दिवस सभी ने बड़ी धूमधाम से मनाया। इस्कॉन द्वारका में हज़ारों की संख्या में भक्तों ने जन्माष्टमी महोत्सव में भाग लेकर अपनी प्रसन्नता को व्यक्त किया और भगवान की कृपा प्राप्त की। इसी कड़ी में बुधवार को अपने प्रिय कान्हा के छठी उत्सव पर भक्तों का उत्साह देखते ही बनता था। सारा वातावरण पीत रंग में रंगा था। हर कोने-किनारों पर रंगोली की बनावट, मंदिर के प्रांगण में सतरंगी फूलों की रंगोली की सजावट मानो ब्रज की याद दिला रही हो। भगवान की पोशाक से लेकर प्रसादम में पीला रंग सबकी पसंद बना। बच्चे और बड़े सभी पीले रंग के परिधानों में मंदिर में प्रवेश करते नज़र आए। मानो सब बधाई गीत गाने और मंगल गान करने के लिए आए हों, जैसे हज़ारों वर्ष पूर्व ब्रज में माँ यशोदा और नंद बाबा को पूरा गाँव बधाइयाँ देने उमड़ पड़ा था। उन्होंने भी अन्न-धन, गाय और अपार संपदा अपने कान्हा की एक मुसकान पर लुटा दिए। ऐसा भक्तिमय वातावरण न केवल हमारी वैदिक संस्कृति की याद दिलाता है बल्कि हमें अपने संस्कारों से भी जोड़े रखता है।

भगवान को इस दिन राजभोग में अनेक व्यंजनों के साथ केसर हलवा और कड़ी चावल का भोग लगाया गया। फिर राजभोग आरती के बाद फिर इसे दिव्य प्रसाद के रूप में भक्तों के बीच वितरित किया गया। प्रसाद वितरण का यह सिलसिला दोपहर 1 बजे से आरंभ हुआ। फिर संध्याकालीन झूलन कार्यक्रम में भक्तों ने कान्हा जी को झूला झुलाया। झूला झुलाते हुए भक्तगण ऐसे प्रतीत हो रहे थे, मानो वह अपने प्रेम की डोरी से मनमोहक भगवान को अपने साथ बाँधना चाहते हैं। ऐसे प्रेममयी भावों को लिए आनंद का यह छठी दिवस भक्ति और प्रेम के रसों से सराबोर रहा। दिन भर सेल्फी प्वाइंट पर लोग सेल्फी लेते दिखाई दिए। फिर रात 8 बजे तक भक्तों ने दिव्य प्रसादम का लाभ लिया और भगवान से यही कामना की कि उनके जीवन में हर दिन उल्लास हो, उत्सव हो और भगवान का साथ रहे।

updated by gaurav gupta 

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