पुरी की तर्ज पर इस्कॉन द्वारका में रथ यात्रा की धूम

–भगवान के रथ को अपने हाथों से खींचने का गौरव पाएँ

–गीत-संगीत, नृत्य-संकीर्तन और आकर्षक व्यंजनों से सजेगा उत्सव 

द्वारका/दिल्ली – भौतिक जीवन में हम बहुत से काम अपनी प्रसन्नता, सुख-समृद्धि व लाभ के लिए करते हैं परंतु भगवान की प्रसन्नता के लिए कोई काम करने में हम हमेशा पीछे रह जाते हैं तो आइए इस साल रथ यात्रा उत्सव में भाग लेकर भगवान जगन्नाथ को प्रसन्न करें। इस्कॉन द्वारका मंदिर 1 जुलाई की शाम साढ़े 5 बजे बजे जगन्नाथ पुरी की तर्ज पर रथ यात्रा निकाली जाएगी।

इसमें सभी दिल्लीवासी आमंत्रित हैं क्योंकि माना जाता है कि जो भी व्यक्ति भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में भाग लेता है और उनके रथ को अपने हाथों से खींचता है उसे भगवान की असीम कृपा प्राप्त होती है। जब भगवान की रथ यात्रा निकल रही हो तो भक्त को चाहिए कि वह तुरंत यात्रा में सम्मिलित हो जाएँ। रथ यात्रा में सभी लोगों को भगवान के रथ के पीछे-पीछे चलना चाहिए क्योंकि यह कभी धीरे तथा कभी तेज मानो भगवान की इच्छा से चल रहा हो।

रथ यात्रा उत्सव में भगवान को रथ पर बैठाकर रथ को शहर की सड़कों से होकर ले जाया जाता है जिससे लोग भगवान के दर्शनों का लाभ उठा सकें। आज से लगभग 500 साल पूर्व श्री चैतन्य महाप्रभु (श्रीकृष्ण) ने भगवान जगन्नाथ, बलदेव, सुभद्रा को उनके रथों पर विराजमान होते देखा तो उनके सामने मनोहारी नृत्य करने लगे।श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी कृत चैतन्य चरितामृत में उल्लेख किया है कि ‘रथेर साजनि देखि लोके चमत्कार, नव हेममय रथ समुेरु आकार’ अर्थात रथ की सजावट इतनी आकर्षक थी कि हर व्यक्ति आश्चर्यचकित था। रथ सोने से बना सुमेरु पर्वत जैसा लग रहा था। उसे देखकर भक्तों ने भावपूर्ण नाम-संकीर्तन किया।

मंदिर के प्रबंधक एवं रथ यात्रा प्रभारी श्री अर्चित प्रभु का कहना है कि, “अनेक बरसों से यह यात्रा परंपरागत रूप से चली आ रही है। इस बार यह रथ यात्रा सेक्टर 13 इस्कॉन मंदिर से चलकर इस्कॉन चौक की ओर होते हुए के एम चौक तक जाएगी। फिर बाएँ मुड़ते हुए सेक्टर 4 और 12 की मार्केट का चक्कर लगाते हुए दाईं ओर मोड़ लेकर सेक्टर 6 और 10 की मार्केट से निकलेगी। फिर वापस मुड़ते हुए सेक्टर 4 और 12 की मार्केट तक जाएगी। फिर सेक्टर 3 और 13 की क्रॉसिंग से होते हुए एमआरवी स्कूल से वापस सेक्टर 13 इस्कॉन मंदिर पहुँचेगी। रथ यात्रा से पूर्व शाम 4 बजे भगवान को 56 भोग अर्पित किए जाएँगे क्योंकि बहुत दिनों तक भगवान जगन्नाथ फलों को रस औषधियों का पान करने के बाद जब ठीक होकर वापस आते हैं तो उन्हें तरह-तरह के पसंदीदा व्यंजन अर्पित किए जाते हैं। एक विशेष आनंद बाजार सजाया जाएगा जिसमें अनेक उड़िया व्यंजन जैसे– खाखरा पीठा, मंडा पीठा, खाजा, मालपुआ, डालमां, राइस, छेना पोड़ा, टानखा, तुर्रानी आदि शामिल रहेंगे। इसके अतिरिक्त नियमित हरे कृष्ण महामंत्र की 16 माला का जप करने वाले द्वारका वासी भक्त अपने-अपने घरों से पाँच-पाँच व्यंजन भी भगवान के लिए बनाकर लाएँगे। 56 भोग के साथ-साथ करीब 2 हजार व्यंजनों का भोग भी भगवान को अर्पण होगा। गीत-संगीत, नृत्य-संकीर्तन और आकर्षक व्यंजनों से सजे इस रथ यात्रा उत्सव में सभी भक्त अधिक से अधिक संख्या में भाग लेकर भगवान के रथ यात्रा दर्शन करें और उनकी कृपा प्राप्त करें। अंत में सभी भक्तजन भगवान का प्रसाद ग्रहण करें।”

रथ यात्रा के संबंध में ऐसा माना जाता है कि अपना अनवसर काल समाप्त करने के बाद भगवान वृंदावन में भक्तों और खासतौर से श्रीमती राधारानी से मिलने जाते हैं क्योंकि वे उनके प्रेम में इतने ज्यादा उत्सुक और भावुक हो जाते हैं कि अपने आप को सँभाल नहीं पाते हैं। भक्तजन उनके इन्हीं मनोभावों को देख-देखकर आनंद उठाते हैं और रथ के आगे खूब कीर्तन व नृत्य करते हैं।

भविष्य पुराण में कहा गया है कि यदि ऐसे रथ यात्रा उत्सव में, चांडाल चाहे उत्सुकतावश ही हो, रथ पर आसीन भगवान का दर्शन करता है तो उसकी गिनती विष्णु के संगियों में की जाती है।

ब्रह्मांड पुराण में कहा गया है, जो व्यक्ति भगवान की रथयात्रा उत्सव का दर्शन करता है और फिर भगवान की अगवानी (स्वागत) करने के लिए खड़ा हो जाता है वह अपने शरीर में से समस्त प्रकार के पापफलों को धो देता है।

भविष्य पुराण में कहा गया है कि यदि रथ यात्रा के समय, जब अर्चा विग्रह आगे से या पीछे से जा रहे हों, तो यदि निम्न कुल में भी उत्पन्न पुरुष रथ के पीछे-पीछे चलता है तो वह निश्चय ही विष्णु के समान ऐश्वर्य प्राप्त करके उच्च पद तक पहुँच जाएगा।

updated by gaurav gupta 

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