
पूर्णिया जिले के बीकोठी के विभिन्न क्षेत्रों पंचायत में मुहर्रम पर्व धूमधाम से मनाया गया। आपको बता दें कि अतिथि के रूप में समाजसेवी त्रिभुवन कुमार भावी जिला परिषद प्रत्याशी ताजिया में शामिल हुए। बता दे की वह बीकोठी के प्रखंड क्षेत्र संख्या दो से भावी जिला परिषद प्रत्याशी भी है। मुलकिया व रसदामपुर के पंचायत सहित विभिन्न क्षेत्रों में ताजिया में शामिल भी हुए और उनके कार्यक्रम का हिस्सा भी बने। लोगों के बीच त्रिभुवन कुमार बेहद लोकप्रिय है। सभी वर्गों के लोगों को साथ लेकर चलना ही उनका लक्ष्य है। त्रिभुवन कहते हैं कि ताजिया एक बेहद पावन पर्व है। मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना और इस्लाम के चार सबसे पवित्र महीनों में से एक है। मुहर्रम का पर्व (आशूरा) इस महीने के दसवें दिन मनाया जाता है, जो पैगंबर मुहम्मद के नवासे (नाती) हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत की याद में शोक और त्याग के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।मुहर्रम का महत्व और इतिहासकर्बला की जंग: 680 ईस्वी में इराक के कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन और जालिम शासक यज़ीद के बीच युद्ध हुआ था। इमाम हुसैन ने यज़ीद की अधीनता स्वीकार करने से इंकार कर दिया था, जिसके लिए उन्हें और उनके परिवार को शहीद कर दिया गया था।मातम और शोक: शिया मुस्लिम समुदाय के लोग मुहर्रम के पहले दस दिनों तक शोक मनाते हैं। इस दौरान काले कपड़े पहने जाते हैं, जुलूस निकाले जाते हैं, और इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद करते हुए ‘ताज़िया’ (मकबरे की प्रतिकृति) निकाला जाता है।सुन्नी समुदाय का उपवास: सुन्नी समुदाय के लोग मुहर्रम के दसवें दिन (आशूरा) को रोजा (उपवास) रखकर, प्रार्थना करके और दान देकर मनाते हैं। यह वही दिन माना जाता है जब पैगंबर मूसा और उनके अनुयायियों को फिरौन से मुक्ति मिली थी।


