मधेपुरा/मुरलीगंज:सवांददाता@ – सरकारें आई सब कुछ हुआ ,बस कुछ नहीं हुआ तो वह है नेशनल हाईवे 107। जी हां हम बात कर रहे हैं इस वक्त सहरसा और पूर्णिया को जोड़ने वाली एनएच 107 की जहां आए दिन सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढे और उसमें जल जमाव की स्थिति से रोज कुछ ना कुछ छोटी बड़ी घटनाएं होती चली आ रही है । फिर भी प्रशासन समेत प्रतिनिधि चुप हैं।आखिर क्या वजह है ,जो सहरसा और मधेपुरा की लाइफलाइन कही जाने वाली एनएच 107 की हाल जस की तस है ।कई बार जन आंदोलन हुए खबरों की प्रकाशित भी हुई। इस राष्ट्रीय राजमार्ग को लेकर राशि की आवंटन भी हुई लेकिन इसके बावजूद सड़क की स्थिति जस की तस है। हर गढ़े तालाब का रूप ले चुकी है ।आए दिन कई व्यापारी जो इसके बगल में अपनी दुकान से अपना भरण-पोषण करते थे ,वह अपना दुकान वहां से शिफ्ट कर कहीं और चले गए ।फिर भी प्रशासन समेत प्रतिनिधि मौन है ।क्या जब तक कोई बढ़िबदुर्घटना नहीं होती ,तब तक इसे चलने लायक भी नहीं बनाया जा सकता ,बस यही सवाल पूछ रही जनता।यदि स्थिति को आप देखेंगे तुम महसूस हो पाएगा कितने मशक्कत कर इन रास्तों से गुजरना पड़ता है।यदि आप जानते होंगे कि कोशी समेत विभिन्न इलाकों के लोग अपनी बीमारी को दिखाने के लिए पूर्णिया जाते हैं। लेकिन इन गड्ढों से गुजरते हुए उनकी आधी मौत रास्ते में ही हो जाती है ।बावजूद स्थिति जस की तस है।आखिर कब सुकून के रास्ते नसीब होंगे ।यह तो बस सरकार और प्रशासन लोग ही बता पाएंगे। लोगों का कहना है कम से कम जाने लायक तो प्रशासन और सरकार बना सकते हैं लेकिन उन्हें इस बात की परवाह कहां आए दिन रोज हम किन मुसीबतों का सामना कर इन सड़कों से गुजरते हैं।
अब तो हालत यह हो चुकी है इन से गुजरना मजबूरी बन चुकी है। बस देखना यह है आखिर कब नजरें खुलती है सरकार व प्रतिनिधि की चुनाव के समय तो बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं। लेकिन हमारे इस दर्द के रास्ते में कौन मरहम लगाने आते हैं बस देखना उन्हें है ।इसी समस्याओं को लेकर मुरलीगंज के युवाओं द्वारा एक दिवसीय सड़क जाम कर विरोध उत्पन्न किया गया ।जिसमें युवाओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और उन्होंने कहा यह सरकार की विफलता है कि वर्षों से यह सड़क गड्ढों में तब्दील है ।रोज घटना की खबरें प्रकाशित भी होती रही है। मगर इस ओर सरकार की कोई भी पहल नहीं दिख रही है ।राशि का आवंटन तो कई वर्ष पहले भी हो गया सड़कों का शिलान्यास भी हो गया लेकिन आज भी सड़क पर चलने लायक नहीं है।निश्चित है सरकार को व प्रतिनिधि को ठोस कदम उठाने की जरूरत है ।आए दिन राजगीर राहगीर काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। updated by gaurav gupta

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