इस्कॉन द्वारका में मकर संक्राति उत्सव

–दिल्ली के तीन सौ भी ज्यादा केंद्रों पर खिचड़ी प्रसाद वितरण 

प्रातः से सायंकाल तक अविराम हरिनाम संकीर्तन 

कई हज़ारों घंटों और सैकड़ों दिनों के एक लंबे इतज़ार के बाद मकर संक्राति का पर्व पुण्य बाँटने आया है। इसलिए दान और पुण्य के इस शुभ पर्व का हम बड़े जोर-शोर से स्वागत करते हैं, आनंद और उत्सव मनाते हैं। बिल्कुल ऐसे ही जैसे पाश्चात्य भौतिकतावादी संस्कृति के लोग नया साल मनाते हैं। नक्षत्रों की गणना के हिसाब से ऐसे ही स्वर्ग में रहने वाले देवता इन दिन अपने नए साल का उत्सव मनाते हैं और देवताओं के उत्सव और खुशी में उनकी प्रसन्नता के लिए हम भी इस धरती पर खुशी और उल्लास मनाते हैं, अच्छे कामों की शुरुआत करते हैं। खिचड़ी और तिल मिष्ठान्नों की भेंट से एक-दूसरे का स्वागत करते हैं। ऐसे ही एक रंग-बिरंगे उत्सव का आयोजन श्री श्री रुक्मिणी द्वारकाधीश इस्कॉन द्वारका, दिल्ली में 15 जनवरी को दोपहर 12 बजे किया जा रहा है।

इस पर्व की महिमा के बारे में जहाँ पुराणों के पन्ने हमें अदुभत जानकारी देते हैं, वहीं साक्षात एवं संक्षिप्त रूप से जाने-माने कथावाचक प्रशांत मुकुंद दास जी के द्वारा इस दिन की महिमा के बारे में बताया जाएगा। जैसा कि मकर संक्राति के विषय में श्रीमद्भगवतगीता में भगवान श्रीकृष्ण ने भी मकर संक्राति यानी उत्तरायण काल की महिमा का वर्णन किया है। यह काल ब्रह्म को प्राप्त करने का दिन है।

अग्निर्ज्योतिरहः शुक्लः षण्मासा उत्तरायण

तत्र प्रयाता गच्छन्ति ब्रह्म ब्रह्मविदो जनाः         

                     (श्रीमद्भगवतगीता, 8. 24)

अर्थात भगवान की भक्ति करने और उनका प्रेम पाने का यह सबसे उत्तम काल है। श्रीमान प्रशांत मुकुंद दास अपने प्रवचनकालीन सत्र में इस पर और विस्तार से प्रकाश डालेंगे।

आम भाषा में इस दिन सूर्य देवता की पूजा और उनका आदर सम्मान किया जाता है। भगवान भी इस दिन पीत रंग के वस्त्र धारण करते हैं और अपनी प्रसन्नता को व्यक्त करते हैं। सूर्य उत्सव के दिन पतंगें भी उड़ाई जाती हैं और कई प्रांतों में इसे पतंग उत्सव के रूप में भी मनाते हैं। इस्कॉन मंदिर प्रांगण में बच्चे और बड़े मुफ्त में पतंगें उड़ा सकते हैं। बच्चे सेल्फी प्वाइंट पर सेल्फी का आनंद ले सकते हैं और महिलाएँ तिल के लड्डुओं और तिल के बने अन्य मिष्ठान्नों में अपनी रुचि दिखाकर परिवार के सदस्यों को प्रसन्न कर सकती हैं और सभी मिल-जुलकर बोनफायर का लुत्फ उठाकर इस उत्सव को यागदार बना सकते हैं।

updated by gaurav gupta 

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