मऊरानीपुर (झाँसी)- हर वर्ष की भाँति इस वर्ष भी नगर में मकर संक्रान्ति का पर्व बडे धूमधाम तरीके के साथ मनाया जायेगा। जो आज 15 जनवरी के रुप में पूरे नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों के साथ पूरे देश में मकर संक्रान्ति का पर्व मनाया जायेगा। जो सूर्य के उत्तरायण की खुशी में मनाया जाता है। एक वर्ष में 12 संक्रातियाँ आती है। जिसमें से 6 संक्रांत उत्तरायण में और 6 दक्षिणायन में आती है। हिन्दू धर्म के शास्त्रों के अनुसार मकर संक्रान्ति से देवताओं का दिन आरम्भ हो जाता है। जो आषाढ मास तक रहता है। इस दिन सूर्य धनुराशि से गोचर करके मकर राशि में प्रवेश करता है। मकर संक्रान्ति के दिन से ही सूर्य की उत्तरायण गति भी प्रारम्भ हो जाती है। भारत के कई स्थानों पर इसे उत्तरायणी के नाम से भी जाना जाता है। तमिलनाडु में संक्रान्त को पोंगल नामक उत्सव के रुप में भी लोग मनाते है। मकर संक्रान्ति के दिन शुभ मुहुर्त में स्नान और दान करके पुण्य कमाने का महत्व माना जाता है। इस दिन भगवान को खिचडी का भोग लगाया जाता है। कई स्थानों पर इस दिन मृत पूर्वजों की आत्मा की शान्ति के लिये खिचडी दान करने की परम्परा भी मानी जाती है। मकर ंसंक्रान्ति के दिन तिल और गुड का प्रसाद बाँटा जाता है। कई स्थानों पर पतंगें उडाने की परम्परा भी है। इस पर्व को पूरे भारत में विभिन्न रुपों में मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश के पंजाब और हरियाणा में इसे लोहडी के रुप में मनाया जाता है। इसी के साथ तमिलनाडु में इसे प्रमुख रुप से पोंगल के नाम से भी जाना जाता है। विशेषकर ये पर्व नई फसल की बुआई और कटाई के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। और किसानों के लिये इसे प्रमुख त्यौहार माना जाता है।इस प्रकार होता खिचडी का दान मकर संक्रान्ति के दिन मुख्य रुप से तो गंगा का स्नान माना जाता है और अगर गंगा का स्नान नही हो पाता है तो किसी भी नदी में स्नान कर सकते है। और मकर संक्रान्ति के पुण्य का प्राप्त कर सकते है। संक्रान्त के स्नान को महास्नान कहा जाता है। इस दिन हुये सूर्य गोचर को अन्धकार से प्रकाश की तरफ बढना माना जाता है। प्रकाश लोगों के जीवन में खुशियाँ लाता है। इसी के साथ इस दिन अन्न की पूजा होती है। और प्रार्थना की जाती है। कि इस साल इसी तरह हर घर में अन्न धन बना रहे।इस दिन देव होते है धरती पर अवतरितमकर संक्रान्ति के दिन सूर्य धनु राशि से गोचर करता है और मकर राशि में आता है। और अन्धकार का नाश होता है। शास्त्रों और पुराणों के अनुसार माना जाता है कि मकर संक्रान्ति का पर्व ब्रहमा, विष्णु , महेश, गणेश, आधशक्ति और सूर्य की आराधना का व्रत माना जाता है। नये साल की शुरुआत के साथ त्यौहारों का सिलसिला शुरु हो जाता है। साल के पहले महीने में लोहडी और मकर संक्रान्ति का पावन पर्व मनाया जाता है। जो मकर संक्रान्ति के रुप में मनाया जाता है। शास्त्रों और पुराणों के अनुसार मनाया जाता है। कि मकर संक्रान्ति का पर्व ब्रहम्मा , विष्णु , महेश, गणेश, आध शक्ति और सूर्य की आराधना का व्रत माना जाता है। इस पावन दिन के लिये हमारे समाज में अन्य कथायें प्रचलित है जिनके अनुसार इसे दिन की उत्पत्ति का दिन माना जाता है। भगवान आशुतोष ने इस दिन भगवान विष्णु को आत्मज्ञान दिया था। इसी के साथ महाभारत की कथा के अनुसार भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिये मकर संक्रान्ति के दिन ही गंगा जी भागीरथ के पीछे पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली। इसी कारण से आज के दिन गंगा स्नान और तीर्थ स्थलों पर विशेष स्नान और दान का महत्व माना जाता हे। मकर संक्रान्ति के दिन सूर्य अपने पुत्र शनि के घर एक महीने के लिये जाते है। क्योंकि मकर राशि का स्वामी शनि का माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र अनुसार माना जाता है। कि सूर्य और शनि का तालमेल संभव नही है। इस दिन को पिता पुत्र के रिश्ते में निकटता के रुप में देखा जाता है। मकर संक्रान्ति के दिन के भगवान विष्णु ने असुरों का अन्त करके शुद्व समाप्ति की घोषणा की थी। उन्होनें सभी असुरों के सिरों को मंदार पर्वत में दबा दिया था। इस दिन को नकारात्मकता पर सकारात्मकता की जीत का उत्सव भी माना जाता है।पवित्र नदियों में स्नान करने का महत्वपौराणिक मान्यताओं के अनुसार माना जाता है कि इस दिन देव भी धरती पर अवतरित होते है। और आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। मकर संक्रान्ति के दिन सूर्य धनु राशि से गोचर करता हुआ मकर राशि में आता है। इसके बाद से दिन बडे होने शुरु हो जाते है। और अन्धकार का नाश होता है। इस दिन पुण्य , दान, जप तथा धार्मिक अनुष्ठानों का महत्व माना जाता है। कई स्थानों पर इस दिन मृत पूर्वजों की आत्मा की शान्ति के लिये खिचडी दान करने की परम्परा भी माना जाती है। ऐसा होगा पर्व का स्वरुपवाहन- सिंहउपवाहन-हाथीवस्त्र- श्वेतपात्र- स्वर्णभद्वाण- अन्नसूर्य के राशि परिवर्तन का 12 राशियों पर असरमेष- धन लाभ ।वृष- हानि।मिथुन- लाभ।कर्क- कार्यसिद्वि।सिंह-पुण्य लाभ।कन्या- कष्ट और पीडा।तुला- सम्मान व प्रतिष्ठा।वृश्चिक- भय व व्याधि की आश्ांका।धनु – सफलता।मकर- सावधान।कुंभ- धन लाभ।मीन- कार्यसिद्वि।ये है मकर संक्रान्ति का शुभ मुर्हुतमकर संक्रान्ति 14 जनवरी को मकर राशि के सूर्य संक्रान्ति रात में 2 बजकर 19 मिनट पर आयी है। शास्त्रों और पण्डितो के अनुसार बताया गया कि अगर रात में मकर संक्रान्ति आती है तो उसका पुण्य दान दूसरे दिन होता है। और खिचडी भी भी दान दूसरे दिन होती है जो आज 15 जनवरी को दान पुण्य होगा। रिपोर्ट_सौरभ भार्गव अनुभवी आँखें न्यूज मऊरानीपुर ।

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