मुरलीगंज(संवावदाता चंचल कुमार) – दिव्य जागृति संस्थान के सौजन्य से मुरलीगंज में चल रहे नौ दिवसीय भागवत कथा यज्ञ में कथा प्रवचन करने आई आशुतोष महाराज जी की शिष्य कालिंदी भारती ने प्रेस वार्ता के दौरान सामाजिक चिंतन और सामाजिक विचारधारा पर अध्यात्म से जुड़े कुछ सवालों के जवाब दिए।

सवाल:-आस्था के इस अलग मंच की आवश्यकता हिंदू समाज में क्यों पड़ी
उत्तर:-हमें (आमजन) धर्म की सही परिभाषा नहीं पता यह सच है कि भारत एक आध्यात्मिक देश है, हम आज आध्यात्मिक से दूर होते चले जा रहे हैं यहां जितने भी मंच बढ़ रहे हैं इसके कारण समाज में अनैतिकता पापाचार आदि बढ़ रहे हैं।

गुरुदेव आशुतोष महाराज जी का कहना है कि जब जब इंसान धर्म से दूरी बढ़ाएगा समाज में पापाचार और और अनैतिकता बढ़ता चला जाएगा।इंसान का रूट लेवल धर्म है, और अगर धर्म ही खत्म हो जाएगा तो इंसान में अनैतिकता बढ़ती चली जाएगी। आज सभी धर्म की बातें तो करते हैं धर्म को जीवन में कैसे उतारा जाए इसकी बात कोई नहीं करता।
प्रश्न:-आज समाज में धार्मिक तनाव और धार्मिक हिंसा बढ़ा चला जा रहा है जबकि धर्म भाईचारा सिखाता है. इस पर आपके क्या विचार है?

उत्तर:- हमारा समाज अलग-अलग संप्रदाय अलग-अलग धार्मिक विभाजन के कारण हुआ है. हमारा धर्म, सनातन धर्म है धर्म चाहे कोई भी हो, कभी वह हिंसा का मार्ग नहीं सिखाता‌ । आप इतिहास उल्टा करके देखें जितने भी रक्त रंजित होलियाँ खेली गई है। इन्हीं संप्रदायवाद के नाम पर,आप सोचिए क्या भगवान के मिलन का मार्ग हिंसा का मार्ग हो सकता है क्या? परमात्मा जो शाश्वत धर्म है लड़ाई झगड़े के मार्ग पर अग्रसर कर सकता, समाज में जो धार्मिक दंगे और उन्माद फैलाए जा रहे हैं अज्ञानता के कारण, धर्म की सही परिभाषा हमारे समाज में बतलाई ही नहीं गई ,स्वामी विवेकानंद जी का विदेशों में गए थे उनसे भी पूछा जाता व्हाट इज रिलिजन तो उन्होंने कहा था, (रिलीजन रियलाजेशन आफ गॉड) परमात्मा के साक्षात अनुभूति अपने घट के अंदर अनुभूति कर लेना ही सही अर्थों में धर्म है इंसान अगर इंसान को शाश्वत धर्म के साथ जोड़ना शुरू कर देगा उस दिन धर्म का साम्राज्य स्थापित होगा।

प्रश्न:- आज देश के अंदर धर्म के नाम पर कई अनैतिक कार्य हो रहे हैं इस पर आपका क्या विचार?
उत्तर:- हमारे धर्म शास्त्र भी कहते हैं राजनीति धर्म का एक समन्वय है जब राजनीति में से धर्म निकला जाता है उसकी हालत ठीक वैसे ही है जैसे शरीर में से आत्मा का निकलना ।जब जब राजनीति ने संप्रदाय का सहारा लिया है तब तक रक्त रंजित होली खेली गई एवं अन्य अनैतिक कार्य हुए हैं राजनीतिक लोग कभी क्षेत्रवाद के नाम पर कभी संप्रदायवाद के नाम पर सभी को धर्म के नाम पर बांटकर आपस में लड़ाने का काम किया। दिव्य महापुरुष इस धरा पर जब जब भी आया है इसे बांटने का काम नहीं किया उन्होंने हमेशा जोड़ने का कार्य किया। उन्होंने जाति धर्म संप्रदाय कुल वंश के आधार पर समाज को तोड़ने का काम नहीं किया उन्होंने सभी को एक किया है।

प्रश्न:-राजनीति को धर्म के साथ मिलाना कहां तक आप उचित मानते हैं?
उत्तर:-हम लोग राजनीति पर इतनी ज्यादा चर्चा नहीं करते. यह हमारा क्षेत्र नहीं है। हम अगर इंसान इंसान के साथ साथ धर्म से जोड़कर सही मार्ग देंगे। तब ही राजनीति में परिवर्तन आ सकता है इसीलिए प्लेटो ने भी कहा हर जो अध्यात्म वाला है उसे राजा होना चाहिए, नहीं तो एक राजा को अध्यात्म वादी जरूर होना चाहिए, तभी समाज में और राष्ट्र में परिवर्तन आ सकता है। एक व्यक्ति ने महाराज जी से आकर कहा गीता में धर्म पर बड़ी लंबी चौड़ी बात कही गई है गीता में श्रीकृष्ण ने कहा है सारे धर्मों का परित्याग करके तुम मेरी शरण में आ जाओ, दूसरी तरफ भगवान श्री कृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं कि जब जब इस धरती पर धर्म की हानि होगी तब तक मैं किसी न किसी रूप हर युग में अवतार धारण कर आता हूं यहां पर विरोधाभास हो जाता है हमारे महाराज जी ने बताया कि गीता संस्कृत में है और संस्कृत को सही रूप से परिभाषित कर उसे बताया जाना चाहिए और बताया भी था रहा है यही उद्देश्य है भागवत कथा का।

प्रश्न:-आप लोग जहां भी प्रवचन करते हैं वहां एक बड़ी भीड़ उपस्थित होती है, आम जनता उपस्थित होते हैं ,पर क्या लोग अपने जीवन में उतार नहीं पाते हैं इस कान से सुनते है उस कान से निकाल देते हैं?
उत्तर:-इस मंच से ईश्वर दर्शन की बात कही जाती है. कल ही यहां से बहुत सारे लोगों ने यहां दीक्षा ली है. आप उनसे संपर्क साध सकते हैं जो खुद बता देंगे कि उनके जीवन में परिवर्तन आ रहा है या नहीं।पहले उनको जीवन में धारण करना होता है जब आचरण में उसे उतारेंगे तो उसका लाभ मिल सकता है।

प्रश्न:-आशुतोष महाराज जी के समाधि में जाने पर बहुत सारा विवाद भी हुआ था हम जानना चाहते हैं क्या वे लौट के आएंगे,?
उत्तर:- महाराज जी ने समाधि धारण की है यह कोई विशेष कार्य नहीं किया है। हमारे यहां जो संस्कृति है उसी के अनुसार महाराज जी ने समाधि धारण की है। आप इतिहास को देखें भारतवर्ष में ऐसे कई महापुरुष और कई सिद्ध पुरुष हुए हैं जिन्होंने समाधि धारण की है। आदि गुरु शंकराचार्य जी समाधि धारण की थी समाधि धारण करने के बाद उनके जो शिष्य थे उन्होंने उनके शरीर को सुरक्षित रखा था। इसी प्रकार रामकृष्ण परमहंस के साथ ऐसा ही हुआ । महाराज जी ने कहा है कि एक समय आएगा मैं फिर इसी शरीर में लौट आऊंगा।

प्रश्न:-अध्यात्म और विज्ञान दोनों दो किनारे हैं जो आपस में आज तक नहीं मिले हैं क्या ऐसा संभव है कि दोनों एक साथ चलें?
उत्तर:- एक बहुत बड़े वैज्ञानिक ने कहा है कि धर्म के बिना विज्ञान लंगड़ा है और विज्ञान के बिना अध्यात्म अंघा है जब तक सही अर्थों में विज्ञान और अध्यात्म का समन्वय में नहीं होगा तो विज्ञान एकाकी चल चलता रहेगा और इंसान सर्वनाश की ओर कदम बढ़ाता चला जाएगा इतिहास इस बात का साक्षी है विज्ञान ने जब जब धर्म का साथ छोड़ा है तो विज्ञान विनाशकारी से हुआ है।

प्रश्न:-राम मंदिर के मुद्दे पर पर दिव्य जागृति ज्योति संस्थान के क्या विचार,?
उत्तर:-मैं इस दिशा में ज्यादा कुछ कहना नहीं चाहूंगी प्रभु श्री राम जी को अगर हम इंसान राम को जान ले राम जो है रमण करने वाली शक्ति है वे कोई शरीर नहीं थे जो त्रेता युग में आए और राम राज्य की स्थापना कर गए ,क्योंकि राम जी की राम राज्य हमारे भीतर आज भी है हमें जानना पड़ेगा, रामराज्य वास्तविकता उस दिन समझ जाएंगे जिस दिन सही अर्थों में राम को जान लिया, उस दिन या विवाद ही खत्म हो जाएगा।

प्रश्न:- हिंदू धर्म में शाखाएँ हैं फिर भी सामाजिक कल्याण के लिए आपने भागवत मार्ग को ही क्यों चुना?
उत्तर:-जो शाश्वत उसी मार्ग पर चलते हैं युधिष्ठिर जब वनवास में गए तो यक्ष ने भी उनसे प्रश्न किया था कौन सा पंथ सही है। तो उन्होंने उत्तर दिया था। हम उसी मार्ग का चयन करते हैं जिसपर हमारे ऋषि महात्मा पुर्व से चलते आ रहे हैं मैं उस सनातन मार्ग का अनुसरण करता हूं वह सनातन धर्म मार्ग है जिसका चयन हमने किया है। updated by gaurav gupta

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